Friday, July 19, 2024
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गिरिपार क्षेत्र के आंजभोज में पहले विशु मेले का श्री शिरगुल महाराज की तपोस्थली बुंगा टींबी में इस दिन होगा आयोजन 

आंजभोज के टौंरू,भैला,कलाथा तीनों गांव के सभी ग्रामवासियों की तरफ से सभी जनता को आमंत्रित किया गया है कि आप सब हमारी पहाड़ी संस्कृति को जिंदा रखने में हम सब का सहयोग करें। इस मेले में टोंरु, भेला और कलाथा से शिरगुल महाराज की पालकी आएगी और हर साल की तरह सांकृतिक कार्यक्रम में लोग भी शामिल होगें। बता दें कि इस दिन केंद्रीय चुडेश्वर सेवा समिति और आंजभोज चुडेश्वर सेवा समिति के द्वारा एक पुस्तिका का अनावरण भी किया जाएगा टौंरू,भैला,कलाथा तीनों गांव की तरफ से, हजार साल पुराने इतिहास को लोगों के सामने लाने का एक प्रयास इस एक पुस्तिका के माध्यम से किया जा रहा है। जिसमें बूंगा टीबी टोंरू में अवतरित श्री शिरगुल महाराज के अवतरित होने की कथा को विस्तार से लिखा गया है। श्री शिरगुल महाराज स्वयं साक्षात भगवान शिव शंकर के ही अवतार हैं, इसीलिए इनको शिरगुल महादेव भी कहा जाता है।

 

 

इसमें आपको टौंरू,भैला,कलाथा और हमारे 3 भाई गांव जो जौनसार में है और हमारे। 8 से 10 भाई गांव जो चौपाल में है (अर्थात 16 भाई गांव) इन सभी गांव के सबसे प्राचीन शिरगुल महाराज बुंगा टीबी टौंरू मंदिर के इतिहास की पूरी गाथा के बारे में पता चलेगा। साथ में चूड़ेश्वर महाराज चूड़धार से बुंगा टिंबी क्यों आए? उस विषय पर भी विस्तार से लिखा गया है। पहली बार टौंरू,भैला,कलाथा तीनों गांव को आँज का नाम देना और इसी शब्द को पहाड़ी भाषा में आँजो कहा जाता है और अंजवाल भी कहा जाता है, यह सब कुछ विस्तार से बताया गया है। हम उम्मीद करते हैं कि सभी लोग उस दिन पूजनीय स्थान बुंगा टिंबी में उपस्थित होकर, इस कथा के बारे में जानेंगे। यह पुस्तिका आपको मुफ्त में दी जाएगी। एक साल की मेहनत करके, ग्रामवासियों ने बहुत से लोगों और पंडितों से तथ्य इकट्ठे करके यह कथा लिखी है।

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