Monday, July 15, 2024
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नारग के मां कामाख्या शक्तिपीठ अजगा आश्रम में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ का संपन ।। सात दिनो तक चला महारुद्र महायज्ञ ।। पूर्णाहुति व विशाल भंडारे के साथ रुद्र महायज्ञ ने लिया विराम

नारग के मां कामाख्या शक्तिपीठ अजगा आश्रम में आयोजित रुद्र महायज्ञ संपन हो गया । नौ दिनो तक चले इस महायज्ञ में प्रतिदिन हवन किया गया आश्रम के संचालक स्वामी विशुद्दानंद के अनुसार श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित पंच कुण्डीय श्री महारुद्र यज्ञ शुभारंभ शोभा यात्रा एंव यज्ञ कलश यात्रा के साथ हुआ था । उन्होंने कहा कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है ।
जो भगवान शिव को समर्पित किया जाता है जब कोई भगवान शिव को रूद्र अभिषेक जैसे अनुष्ठान से खुश करता है । तो वह उसे आशीर्वाद प्रदान करते है । भगवान शिव के आशीर्वाद से किसी भी व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याएं स्वंत ही हल जाती है

यज्ञ वेदों का हृदय, सनातन धर्म का अभिन्न अंग और नाभि के समान संसार का मूल है। हमारे क्षेत्र में प्राचीन काल से ही विभिन्न प्रकार के यज्ञ किये जाते रहे हैं।
रुद्र भगवान शिव के प्रसिद्ध नामों में से एक है। भगवान शिव की पूजा के लिए विभिन्न वेद मंत्रों का उपयोग किया जाता है और इनमें से एक है श्री रुद्रम। यह अत्यंत उच्च क्षमता वाला वैदिक मंत्र है। शिवलिंग को पवित्र स्नान कराकर रुद्राभिषेक करना बहुत प्रसिद्ध पूजा है। भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है क्योंकि शिव को प्रसन्न करना बहुत आसान है। यह यज्ञ सभी महायंज्ञो में सबसे शक्तिशाली यज्ञ है। रुद्र यज्ञ सभी नकारात्मक प्रभावों, बाधाओं, हमारे पापों को धोने और भक्तों के जीवन को स्वस्थ और समृद्ध बनाए रखने के लिए किया जाता है।रुद्र यज्ञ के पीछे की कहानी यह है कि भगवान शिव ने भस्मासुर का वध करने के बाद लोगों के कल्याण के लिए रुद्र यज्ञ किया था। अभिषेक के साथ-साथ ऋग्वेद के श्री रुद्र मंत्र का जाप किया जाता है। रुंद्र यज्ञ करने से भक्त को आध्यात्मिक और भौतिक दृष्टि से लाभ मिल सकता है। एक बार नमकम् का जाप और फिर एक बार चमकम् का जाप करना श्री रुद्रम् जाप कहलाता है। एकादश रुद्रम तब कहा जाता है जब ग्यारह नमकम का पाठ किया जाता है और उसके बाद चमकम का एक पाठ किया जाता है। लघु रुद्र एकादश रुद्र के ग्यारह चक्रों से युक्त है। महारुद्र लघुरुद्र के ग्यारह चक्रों से युक्त है। और अति रूद्र महा रूद्र के ग्यारह चक्रों से युक्त है। इस रूद्र महायज्ञ में प्रतिदिन पांच हवन कुड़ो में सैकड़ो लोगो ने आहुतियां डाली और ग्यारह ब्राह्मणो द्वारा प्रतिदिन वेद मंत्रो का उच्चारण कर प्रदेश की प्राकृतिक आपदाओ से रक्षा के लिए प्रार्थना की गई ।।

सिरमौर से कपिल शर्मा की रिपोर्ट

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