Saturday, July 13, 2024
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ये हंसी मजाक नहीं; इंदिरा की हत्या वाले सुरक्षाकर्मी और कंगना को थप्पड़ वाले भी

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य को मंडी से कंगना रनौत ने हरा दिया। लेकिन विक्रमादित्य को संस्कार मिले है। इस तरह के संस्कार सभी में नही हो सकते। हैरानी की बात ये है कि कंगना को थप्पड़ मारने पर हंसने वाले एक बार विक्रमादित्य को तो सुन लेते। जिन्होंने इस घटना की निंदा भी है और दोषी के खिलाफ जांच और कार्यवाही की मांग भी की है। वो भी तब जब उनको चुनाव में क्या क्या नहीं कहा गया। ये चुनावी भाषण है। सभी नेता एक दूसरे पर बोलते है। केजरीवाल को भी थप्पड़ मारा गया था। नेताओं पर स्याही फेंकी जाती है। लेकिन कंगना को एक सुरक्षाकर्मी ने थप्पड़ मारा हैं। जिन पर सुरक्षा की जिमेदारी होती है। फिर तो कोई भी कल के दिन गोली भी मार देगा। हो सकता है कंगना ने गलत बयान दिया हो। तब तो बहुत कम नेता थप्पड़ से बच पाएंगे।

हैरानी की बात ये है कि एक सुरक्षाकर्मी द्वारा, जिस पर सुरक्षा का जिम्मा होता है। इनको शिकायत को रखने के और भी सभ्य तरीके होते हैं। भारतीय राजनीति और सामाजिक जीवन में हम अक्सर इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनते हैं। सीआईएसफ की कांस्टेबल का कहना है कि कंगना ने किसान आंदोलन के खिलाफ बोला था और उस आंदोलन के दौरान उसकी मां भी धरने पर बैठी थी। वह गुस्से में थी और सीआईएसफ की इस कांस्टेबल ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कंगना पर हमला कर दिया। जो लोग इसे सही ठहरा रहे हैं, वे यह समझ लें कि व्यक्तिगत सोच और विचारधारा आपकी ड्यूटी के बीच में नहीं आनी चाहिए।

देशभर में दर्जनों नेता हैं, जो किसी न किसी के खिलाफ बोलते आए हैं। कभी सिक्योरिटी के दौरान किसी सैनिक और पुलिस की भावना उसकी ड्यूटी के बीच आ गई तो? ऐसे लोगों के खिलाफ अगर हर सुरक्षाकर्मी सिक्योरिटी के दौरान अपनी भावनाएं दिखाने लगा तो कानून व्यवस्था का क्या होगा।

 

नेता कई बार पुलिस, मीडिया और अधिकारियों को भ्रष्ट और बहुत कुछ कह जाते है। मीडिया के पास भी नेता करीब से प्रेस कांफ्रेंस करते है। और हमला आसानी से हो जाता है। तब कई लोग नजदीक और सब आसपास होते है।

ये बात समझ से परे है कि लोग कैसे इस महिला के एक्ट को जस्टिफाई कर सकते हैं। क्या लोग यह भूल गए कि ऐसे ही सुरक्षा कर्मचारियों की भावनाएं उनकी

ड्यूटी के बीच आ गई थीं, जिसकी वजह से इंदिरा गांधी की हत्या हुई। हिंसा की भर्त्सना बिना शर्त जब तक नहीं की जाएगी, तब तक उसके लिए कोई औचित्य तलाशा जाता रहेगा और वह विचारधारा के आधार पर सही या गलत मानी जाएगी, उसकी पुनरावृत्ति होती रहेगी।

 

ये थपड़ उतना मारक नहीं है, जितना कि इस थप्पड़ से खुश होने वाले लोगों की हंसी है। इस तरह की विचारधारा को सिर उठाने के पहले कुचल देने की जरूरत है। देश का हर नेता किसी न किसी के बारे में आए दिन जहर उगलता रहता है। अगर हर नेता की बात पर सुरक्षा बलों के जवान इसी तरह रिएक्ट करना शुरू कर दें तो देश की व्यवस्था का क्या होगा?

 

आम आदमी इस तरह करे तो भी इसको बढ़ावा नही मिलना चाहिए। यह काम तो सीआईएसएफ की सुरक्षाकर्मी ने किया है, जो लोगों की सुरक्षा के लिए होती हैं। क्या

यह कंगना के खिलाफ चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर प्लांड अटैक है? सांसद पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हुआ हमला बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सोशल मीडिया पर इस तरह की हिंसा को अगर उत्साह के साथ प्रसारित और प्रचारित किया जाता रहेगा तो इसके दूरगामी प्रभाव होगे। लोकतंत्र के लिए सबसे खतरा साबित होगा।

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