Monday, July 15, 2024
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हिमाचल में बारिश ने फिर मचाई तबाही, एक बच्चे समेत 11 लोगों की मौत, 17 मकान ढहे

हिमाचल प्रदेश में रेड अलर्ट के बीच मंगलवार रात और बुधवार को हुई भारी बारिश ने फिर तबाही मचाई है।

 

खराब मौसम के चलते प्रदेश में एक बच्चे समेत 11 लोगों की मौत हो गई है। छह लोग लापता भी हैं। शिमला के बल्देयां में दंपती की मौत हुई है।

 

जुन्गा में पांच साल के बच्चे पर गेट गिरा है। मंडी में नाना-दोहती, ताई-भतीजी समेत आठ की जान चली गई। मंडी के कुकलाह में स्कूल भवन और खोलानाला में 50 बकरियां और दो दर्जन मवेशी बाढ़ में बह गए हैं।

 

 

 

1,366 बस रूट और 636 पेयजल योजनाएं ठप

प्रदेश में 17 मकान ढह गए, जबकि 105 क्षतिग्रस्त हो गए। राजधानी शिमला में मूसलाधार बारिश और गर्जना ने लोगों को डरा दिया है। शहर के अधिकांश लोगों ने मंगलवार की रात जागकर काटी। मंडी में होटल पर बिजली गिरने से लगी आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जिला की ग्राम पंचायत कशोड में पांच मकान बह गए। प्रदेश में बुधवार शाम तक पांच नेशनल हाईवे समेत 709 सड़कें बंद रहीं। 1,366 बस रूट और 636 पेयजल योजनाएं बाधित रहीं।

 

 

 

1,366 बस रूट और 636 पेयजल योजनाएं ठप

प्रदेश में 17 मकान ढह गए, जबकि 105 क्षतिग्रस्त हो गए। राजधानी शिमला में मूसलाधार बारिश और गर्जना ने लोगों को डरा दिया है। शहर के अधिकांश लोगों ने मंगलवार की रात जागकर काटी। मंडी में होटल पर बिजली गिरने से लगी आग से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जिला की ग्राम पंचायत कशोड में पांच मकान बह गए। प्रदेश में बुधवार शाम तक पांच नेशनल हाईवे समेत 709 सड़कें बंद रहीं। 1,366 बस रूट और 636 पेयजल योजनाएं बाधित रहीं।

 

ब्यास और सहायक नदियों में क्रशर संचालन पर रोक

वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ब्यास नदी के तट और उसकी सहायक नदियों में स्टोन क्रशर तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।

सीएम ने कहा कि बरसात की परिस्थितियों को देखते हुए कांगड़ा जिले में चक्की नदी के अलावा कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर जिलों में ब्यास और इसकी सहायक नदियों के उफान पर होने के कारण यह निर्णय लिया है।

अगले आदेश तक बारहमासी और गैर-बारहमासी दोनों नालों के सभी स्टोन क्रशर के संचालन को बंद किया गया है।

नदियों की दूरी की परिसीमाएं फिर से होंगी परिभाषित

सीएम सुक्खू ने कहा कि विभाग अवैज्ञानिक और अवैध खनन गतिविधियों के संचयी प्रभाव के मूल्यांकन के लिए एक बहुक्षेत्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन करके एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन भी करेगा। इस अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर दूरी से संबंधित परिसीमाएं फिर से परिभाषित की जाएंगी।

इससे नदियों के पास पर्यावरण को संरक्षित करने और राज्य में अन्य ऐसी किसी भी मानवजनित आपदा से बचने के लिए ऐसे कार्यों का विनियमन और प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

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